"दिल की धडकन, तेरे नाम"
शहर की गलियों में एक छोटी सी किताब की दुकान खुली थी, जिसका नाम "पुस्तक की दुनिया" था। यहाँ के मालिका, एक सुंदर सी लड़की आदिति थी, जो किताबों के संग्रह में खो जाती थी।
एक दिन, जब बारिश की बूँदें गिर रही थीं और दुकान में गरम चाय की खुशबू फैल रही थी, एक युवक वीराज वहाँ आया। उसकी आँखों में खुदाई की जिज्ञासा और समझ ही जाती थी।
आदिति ने वीराज को कुर्सी पर बैठने के लिए आमंत्रित किया और उसे गरम चाय परोसी। वीराज ने कुछ किताबों की खोज में बसी अपनी आंखों की जादू से उसे देख लिया।
दिन बितते बितते, दोनों की बातचीत बढ़ती गई, और वे एक-दूसरे की दुनिया में खो गए। वीराज ने आदिति के साथ समय बिताने का एक बहाना ढूंढ़ लिया, और वे बारिश की छत के नीचे मिलकर किताबों की बातें करने लगे।
उनकी बातचीतों से उनकी मित्रता शीघ्र ही मिलने वाले प्यार में बदल गई। आदिति के दिल में वीराज के लिए एक खास जगह बन गई थी, जो उसे अपनी आँखों के सामने उसकी हर मुस्कराहट और हर दुखभरी बात का ख्याल रखने लगा था।
एक बार, जब वीराज ने अपनी भावनाओं को साहस दिया, उसने आदिति से कहा, "आदिति, मैं तुमसे प्यार करता हूँ।"
आदिति थोड़ी सी हकीकत में शरम से लाल हो गई, परंतु उसने वीराज के आँखों में उसके प्यार की सच्चाई देख ली। वह हँसते हुए उसके पास आई और बोली, "मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ, वीराज।"
उनकी कहानी "दिल की धडकन, तेरे नाम" वीराज और आदिति के प्यार की कहानी बन गई। उनका प्यार किताबों की दुनिया से लेकर अपनी खुद की दुनिया बन गया, जो हमेशा उनके दिलों में बसी रहेगी।
No comments:
Post a Comment